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3 मार्च का चंद्र ग्रहण: क्या करें, क्या न करें और कैसे लें आध्यात्मिक लाभ - प्रेरणामूर्ति भारती श्रीजी

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  3 मार्च 2026 , मंगलवार को फाल्गुन पूर्णिमा (होली) के पावन दिन एक पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) लगेगा। भारत में यह ग्रहण अपने अंतिम चरण में, चंद्र उदय के समय दिखाई देगा — इसे ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण कहा जाता है। यह केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शक्तिशाली समय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के समय किया गया जप सामान्य समय की तुलना में अनंत गुना फलदायी होता है। इसलिए यह दिन केवल सावधान रहने का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का भी है। चंद्र ग्रहण 2026 – तिथि और समय (India – IST) तारीख : मंगलवार, 3 मार्च 2026 अवसर : फाल्गुन पूर्णिमा / होली सूतक प्रारंभ - सुबह 9:39 AM सूतक समाप्त - शाम 6:49 PM ग्रहण प्रारंभ (वैश्विक): 03:20 PM (IST) भारत में चंद्र उदय (दृश्यता प्रारंभ) : लगभग 06:22 PM – 06:26 PM अधिकतम दृश्य चरण: 06:33 PM – 06:40 PM ग्रहण समाप्ति (भारत): लगभग 06:46 PM – 06:49 PM चंद्र ग्रहण का आध्यात्मिक महत्व ग्रहण के दिन, विशेषकर चंद्र ग्रहण के समय, मन और चित्त पर सूक्ष्म प्रभाव पड़ता है। मान्यता है कि इस काल में:  किया गया जप, ...

भाग 2: त्याग और तितिक्षा

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  वैराग्य बना जब जीवन का श्रृंगार: एक साध्वी की अग्निपरीक्षा श्रृंखला परिचय यह विशेष तीन-भागों की श्रृंखला का दूसरा अध्याय है, जो पूज्य श्री लक्ष्मीदेवी जी (मैयाजी) के जीवन की प्रेरक यात्रा को आगे बढ़ाता है।  मैयाजी के हृदय की गहराई से एक-एक मोती लेकर उसे पुस्तक-रूपी माला में पिरोने का दुष्कर कार्य उनकी लाड़ली सुपुत्री, प्रेरणामूर्ति भारती जी ने किया है और उसी ‘ज्ञान की गहराई’ पुस्तक से इस लेख की प्रेरणा और संदर्भ ग्रहण किए गए हैं। पहले भाग में हमने उनके संस्कारों की नींव देखी थी। अब हम उस दौर में प्रवेश करते हैं जहाँ जीवन ने उन्हें परखा— और उन्होंने परीक्षा को ही साधना बना दिया। यह वह समय था जब विवाह के बाद त्याग, संघर्ष और तप ने उन्हें एक नई पहचान दी। परिचय: जब विवाह बना वैराग्य का द्वार विवाह को अक्सर जीवन का सबसे सुखद मोड़ कहा जाता है— नई शुरुआत, नए सपने, नई उम्मीदें। लेकिन लक्ष्मीदेवी (पूर्व नाम कलावती) के लिए विवाह की परिभाषा अलग थी। उनके लिए यह संबंध संसार में रमने का अवसर नहीं, बल्कि परमात्मा की ओर बढ़ने का एक मार्ग बन गया। इस भाग में हम जानेंगे— कैसे एक नवविवा...